Click Here!

सोमवार, 2 नवंबर 2015

शायरी

ना अमीर हूँ ना गरीब, ना मैं  बादशाह ना मैं वजीर हूँ.
तेरा इश्क है मेरी सल्तनत मैं उसी सल्तनत का फकीर हूँ
प्रतिक्रियाएँ:

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें