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रविवार, 22 नवंबर 2015

Shayari Collection - शायरी संग्रह 22/11/2015

कहते हैं की जब कोई किसी को बहुत याद करता हैं तो तारा टूट कर
गिरता हैं
एक दिन सारा आसमान ख़ाली हो जायेगा ओंर इल्जाम मुझ पर आएगा।
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 खामोश हूँ मै इतना इसलिये...
क्योकि उन्होंने कहा हैं कि मेरे लिखने से उनकी बदनामी होती है 
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 उन आँखों में भी नमी सी रहेती हैं,
बात करते हैं जो दुसरो को हँसाने के लिए !
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 हम अपनी रूह  तेरे जिस्म में छोङ आये....
गले मिलना तो एक बहाना था....
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 तेरी खूबसूरती तेरे चेहरे से नहीं
मेरे तारीफ करने के अंदाज़ से है
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 बहुत जी चुके उनके लिये जो मेरे लिये सब कुछ थे
अब जीना है सिर्फ उनके लिये जीन के लिये में सब कुछ हूँ
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 यूँ तो सदमो में भी हंस लेते थे हम,
आज क्यों बेवजह ग़मगीन होने लगे हे हम,
बरसों से हथेलियाँ खाली ही रही हे हमारी,
फिर आज क्यों लगा सब खोने लगे हे हम…!
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 मुझे कहाँ से आएगा
लोगो का "दिल" जीतना...
मै तो अपना भी "हार" बैठा हूँ.....
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 माला की तारीफ़ तो करते हैं सब, क्योंकि मोती सबको दिखाई देते हैं
काबिले तारीफ़ धागा है जनाब जिसने सब को जोड़ रखा है
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 गरीब की झोली मे जब एक रुपया डाला तब मेहसुस हुआ,
महगांई के इस दौर मे, दुऑए आज भी कितनी सस्ती है ।
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 लोग कहते है जिसे हद से ज्यादा प्यार करो वो प्यार की कदर नही करता
पर  सच तो ये है की
प्यार की कदर जो भी करता है उसे कोई प्यार ही नही करता
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 हजारों हैं मेरे अल्फाज के दिवाने,
मेरी खामोशी सुनने वाला कोई होता तो क्या बात थी..
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 सारा दिन लग जाता हैं खुद को समेटने में,
फिर रात को उनकी यादों की हवा चलती हैं और हम फिर बिखर जाते हैं!
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मैं। फनाह हो गया अफ़सोस वो बदली भी नहीं
मेरी चाहतो से भी सच्ची उसकी नफरत निकली
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 हो सके तो दूर रहो मुझ से
टूटा हुआ हूँ…चुभ जाऊँगा

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 मुलाकातें तो आज भी हो जाती हैं तुम से
मेरे ख्वाब किसी मजबूरी के मोहताज नहीं है

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 अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास,
अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही


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