दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते है;
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते है;
रक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो;
सू-ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते है;
और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो ;
दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते है;
इक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशन ;
मेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते है;
कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग;
वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते है।
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दिल में अब यूँ तेरे
दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते है;
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते है;
रक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो;
सू-ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते है;
और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो ;
दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते है;
इक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशन ;
मेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते है;
कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग;
वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते है।
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते है;
रक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो;
सू-ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते है;
और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो ;
दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते है;
इक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशन ;
मेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते है;
कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग;
वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते है।
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