Mehroom-e-haqueeqat hai sahil ke tamashai
Ham doob ke samjhe hai dariyaon ki gahrai
Ye jabr bhi dekha hai tareekh ki nazro ne
Lamho ne khata ki thi aur sadiyo ne saza payi
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कहते हैं की जब कोई किसी को बहुत याद करता हैं तो तारा टूट कर गिरता हैं एक दिन सारा आसमान ख़ाली हो जायेगा ओंर इल्जाम मुझ पर आएगा। *******...
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मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा, चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।।
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हाथों की लकीरों पर मत जा ऐ ग़ालिब; नसीब उन के भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते।
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जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे हुई शाम यादों के इक गाँव में परिंदे उदासी के आने लगे घड़ी दो घड़ी मुझको प...
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ख़ुदा महफूज़ रखें आपको तीनों बलाओं से, वकीलों से, हक़ीमों से, हसीनों की निगाहों से। -अकबर इलाहाबादी
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