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मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

यह देखकर जनाजे के फूल भी

यह देखकर जनाजे के फूल भी हैरान हो गए..
कि अब शहीद भी हिन्दू और मुसलमानहो गए..
लहू जो बिखरता है अपने देश की सरहदों पर,
उसके रंग भी राम और रहमान हो गये..!!

सियासत की चालों को कोई समझ न पाया,
खद्दर की खोल में सब शैतान हो गये...
शहरे दिलों में जहां कभी जश्न रहता था,
वहां हरे और केसरिया मकान हो गये..!!
बर्फ में, रेगिस्तानों में, संमुदर में, तूफानों में,
चौकस जवानों के रहबर अब बेईमान हो गये..
मज़हबी बवाल का ज़हर घोल रहे मुल्क की फ़िज़ा में,
कुछ अमित शाह और कुछ आज़म ख़ान हो गये..!
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