तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे;
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे;
तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं;
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे;
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो;
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे;
किन राहों से दूर है मंज़िल कौन सा रस्ता आसाँ है;
हम जब थक कर रुक जायेंगे औरों को समझायेंगे;
अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हो मुम्किन है;
हम तो उस दिन राए देंगे जिस दिन धोका खायेंगे।
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कहते हैं की जब कोई किसी को बहुत याद करता हैं तो तारा टूट कर गिरता हैं एक दिन सारा आसमान ख़ाली हो जायेगा ओंर इल्जाम मुझ पर आएगा। *******...
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जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे हुई शाम यादों के इक गाँव में परिंदे उदासी के आने लगे घड़ी दो घड़ी मुझको प...
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ये दबदबा, ये हकूमत, ये नशा-ए-दौलत; सब किराये के मकान हैं, किराएदार बदलते रहते है।
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ख़ुदा महफूज़ रखें आपको तीनों बलाओं से, वकीलों से, हक़ीमों से, हसीनों की निगाहों से। -अकबर इलाहाबादी
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मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम; एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम; आँसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर; मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे ...
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तन्हा तन्हा हम रो लेंगे
तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे;
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे;
तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं;
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे;
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो;
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे;
किन राहों से दूर है मंज़िल कौन सा रस्ता आसाँ है;
हम जब थक कर रुक जायेंगे औरों को समझायेंगे;
अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हो मुम्किन है;
हम तो उस दिन राए देंगे जिस दिन धोका खायेंगे।
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे;
तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं;
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे;
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो;
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे;
किन राहों से दूर है मंज़िल कौन सा रस्ता आसाँ है;
हम जब थक कर रुक जायेंगे औरों को समझायेंगे;
अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हो मुम्किन है;
हम तो उस दिन राए देंगे जिस दिन धोका खायेंगे।
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