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शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

तेरी ख़ुशी की खातिर



तेरी ख़ुशी की खातिर मैंने कितने ग़म छिपाए..

अगर मैं हर बार रोता तो तेरा शहर डूब जाता..