Click Here!
2 liner लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
2 liner लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 17 सितंबर 2015

घड़ी घड़ी

घड़ी घड़ी वो भी हिसाब करने बैठ जाते है ....
जबकि पता है, जो भी हुआ था , बेहिसाब हुआ था

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

अल्लामा इकबाल


तेरे इश्क़ की इन्तेहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ..

काबिल अजमेरी


मानोन मानो मगर हक़ीक़त है
ये इश्क इंसान की ज़रूरत है


रियाज खैराबादी


दिल-जलों से दिल्लगी अच्छी नहीं
रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं


सुना है,..

सुना है,..
नफरत की दुकान खोल रहे हो

थोडी मोहब्बत भी,
रख लेना दिखावे के लिये..

सोमवार, 14 सितंबर 2015

हमने तो एक मुद्दत से

हमने तो एक मुद्दत से सोना ही छोड़ दिया
बस इसी डर
से कि
ख़्वाबों में भी अगर बिछड़े तो हकीकत में मर जायेंगे…

नासिर काज्मी

ए दोस्त हमने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
 की है महसूस तेरी ज़रूरत कभी कभी.


जिगर मोरादाबादी


हम इश्क़ के मारे हुवों का इतना ही फ़साना है
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है.


राहत इन्दौरी


बोतलें खोल कर तो पी  ली बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए.


मोमिन खान मोमिन


तुम हमारे किसी भी तरह ना हुए
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता.


हफीज जालंधरी


इरादे बांधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ
कहीं ऐसा न हो जाए कहीं वैसा न हो जाए.

हफीज जालंधरी


यारों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं.


शनिवार, 12 सितंबर 2015

दाग़ देहलवी


हुआ है चार सज्दों पर ये दावा ज़ाहिदो तुम को
ख़ुदा ने क्या तुम्हारे हाथों जन्नत बेच डाली है

जाँ निसार अख़्तर


अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द  को मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं

दिल की हकीकत


जुबाँ दिल की हक़ीक़त को क्या बयाँ करती
किसी का हाल किसी से कहा नहीं जाता l

बेख़ुद देहलवी


नमक भर कर मेरे ज़ख़्मों में तुम क्या मुस्कुराते हो
मेरे ज़ख़्मों को देखो मुस्कुराना इस को कहते हैं

शनिवार, 22 अगस्त 2015

इश्क

वो इश्क़ हि क्या जिसमे हिसाब हो...
मोहब्बत तो हमेशा बेहिसाब होती है.

वो शख्स

बगैर जिसके एक पल भी गुजारा नहीं होता,
सितम देखिए वही शख्स हमारा नहीं होता !

ख्वाहिशें

मैं अब भी बाज़ार से अक्सर खाली हाथ लौट आता हूँ
पहले पैसे नहीं थे अब ख्वाहिशें नहीं रहीं

मुकद्दर

जिनका मिलना मुकद्दर मे लिखा नही होता
उनसे मुहबत कसम से कमाल की
होती है ।।।