ये दिल लेते ही शीशे की तरह पत्थर पे दे मारा,
मैं कहता रह गया ज़ालिम मेरा दिल है, मेरा दिल है ।
हज़ारों दिल मसल कर पाँव से झुँझला के फ़रमाया,
लो पहचानो तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है ।
-अकबर इलाहाबादी
Amazon
Popular Posts
-
Besabab bat badhane ke zarurat kya hai hum khafa kab the manane ke zarurat kya hai aap ke dam se to duniya ka bharam hai qayam aap jab ha...
-
बेपर्दा नज़र आईं जो चन्द बीवियाँ ‘अकबर’ ज़मीं में ग़ैरते क़ौमी से गड़ गया पूछा जो उनसे -‘आपका पर्दा कहाँ गया?’ कहने लगीं कि अक़्ल पे मर्दों ...
-
Na milega jab koi use hmari tarah chahne wala, bahut royega wo shakhs us din humein dobara pane ke liye….
-
घड़ी घड़ी वो भी हिसाब करने बैठ जाते है .... जबकि पता है, जो भी हुआ था , बेहिसाब हुआ था
-
आप जिनके क़रीब होते हैं आप जिनके क़रीब होते हैं, वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं जब तबीयत किसी पर आती है, मौत के दिन करीब होते हैं मुझसे मिल...
Visitors Count
Join Us Here
Blogger द्वारा संचालित.