सफ़र लिख दे, रास्ता ही लिख दे
किसी मंज़िल
से, मेरा वास्ता ही लिखदे
ऐसा क्यूँ है, के बेमक़सद जिए जा रहा हूँ मैं
मेरी
क़िस्मत में, कोई हादसा ही लिख दे
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कहते हैं की जब कोई किसी को बहुत याद करता हैं तो तारा टूट कर गिरता हैं एक दिन सारा आसमान ख़ाली हो जायेगा ओंर इल्जाम मुझ पर आएगा। *******...
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मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा, चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।।
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जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे हुई शाम यादों के इक गाँव में परिंदे उदासी के आने लगे घड़ी दो घड़ी मुझको प...
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ख़ुदा महफूज़ रखें आपको तीनों बलाओं से, वकीलों से, हक़ीमों से, हसीनों की निगाहों से। -अकबर इलाहाबादी
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जिनका मिलना मुकद्दर मे लिखा नही होता उनसे मुहबत कसम से कमाल की होती है ।।।
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