मिली जो किसी से नज़र तो समझो गजल हुई
रहे न अपनी ही खबर तो समझो गजल हुइ
मिला के नजरों को वाले हना हया से पी
झुका ले कोइ नजर तो समजो गजल हुइ
इधर मचल-कर उन्हें जो पुकारे जूनून मेरा
धड़क उठे उधर दिल तो
उदास बिस्तर की सिलवटेँ जब तुमको चुभें
न सो सको रात भर तो समझो गजल हुइ
वह बदगुमान हो तो शेर सूझे न शायरी,
वह मेहरबान हो जफ़र तो समझो गजल हुइ
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समझो गजल हुई
मिली जो किसी से नज़र तो समझो गजल हुई
रहे न अपनी ही खबर तो समझो गजल हुइ
मिला के नजरों को वाले हना हया से पी
झुका ले कोइ नजर तो समजो गजल हुइ
इधर मचल-कर उन्हें जो पुकारे जूनून मेरा
धड़क उठे उधर दिल तो
उदास बिस्तर की सिलवटेँ जब तुमको चुभें
न सो सको रात भर तो समझो गजल हुइ
वह बदगुमान हो तो शेर सूझे न शायरी,
वह मेहरबान हो जफ़र तो समझो गजल हुइ
रहे न अपनी ही खबर तो समझो गजल हुइ
मिला के नजरों को वाले हना हया से पी
झुका ले कोइ नजर तो समजो गजल हुइ
इधर मचल-कर उन्हें जो पुकारे जूनून मेरा
धड़क उठे उधर दिल तो
उदास बिस्तर की सिलवटेँ जब तुमको चुभें
न सो सको रात भर तो समझो गजल हुइ
वह बदगुमान हो तो शेर सूझे न शायरी,
वह मेहरबान हो जफ़र तो समझो गजल हुइ
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