इश्क नाजुक मिजाज है बेहद..
अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता..
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प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं; कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं; बेरुख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी; एक मुद्दत से हमें उस न...
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ना अमीर हूँ ना गरीब, ना मैं बादशाह ना मैं वजीर हूँ. तेरा इश्क है मेरी सल्तनत मैं उसी सल्तनत का फकीर हूँ
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mujhe ghuman tha ki chaha bahut sabne mujhe main aziz sabko tha magar jaroorat ki tarah
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ऐ बादल ! मेरी आँखें तुम रख लो.. कसम से बङी माहिर है बरसने में..
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मिली जो किसी से नज़र तो समझो गजल हुई रहे न अपनी ही खबर तो समझो गजल हुइ मिला के नजरों को वाले हना हया से पी झुका ले कोइ नजर तो समजो गजल...
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