कहते हैं की जब कोई किसी को बहुत याद करता हैं तो तारा टूट कर गिरता हैं एक दिन सारा आसमान ख़ाली हो जायेगा ओंर इल्जाम मुझ पर आएगा।
**************************
खामोश हूँ मै इतना इसलिये... क्योकि उन्होंने कहा हैं कि मेरे लिखने से उनकी बदनामी होती है
**************************
उन आँखों में भी नमी सी रहेती हैं, बात करते हैं जो दुसरो को हँसाने के लिए !
**************************
हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोङ आये.... गले मिलना तो एक बहाना था....
**************************
तेरी खूबसूरती तेरे...
रविवार, 22 नवंबर 2015
रविवार, 8 नवंबर 2015
Posted by Maneesh on 12:01 pm with No comments
शुभ दीपावली शायरी - शुभ दीवाली शायरी
दिवाली के उपलक्ष्य में कुछ चलती फिरती शायरियां पोस्ट कर रहा हूँ. किसी को शुभकामनाएं देने में बहुत काम आएँगी आपके.
आपको सपरिवार शुभकामनाओं सहित
******शुभ दीपावली - Happpy
Diwali******
रोशन हो दीपक ओर सारा जग जगमगाए
लिए साथ सीता मैय्या को राम जी हैं आए
******शुभ दीपावली - Happpy
Diwali******
हर शहर यू लगे मानो अयोध्या हो
आओ हर द्वार हर गली हर मोड़ पे हम दीप जलाए
******शुभ दीपावली - Happpy
Diwali******
दियों की रोशनी से झिलमिलता...
सोमवार, 2 नवंबर 2015
Posted by Maneesh on 5:40 pm with No comments
ना अमीर हूँ ना गरीब, ना मैं बादशाह ना मैं वजीर हूँ.
तेरा इश्क है मेरी सल्तनत मैं उसी सल्तनत का फकीर हूँ...
सोमवार, 19 अक्टूबर 2015
Posted by Maneesh on 11:00 am
माँ पर शायरी
मोहब्बत की बात भले ही करता हो जमाना
मगर प्यार आज भी "माँ "से शुरू होता है
--------------------------------------------
ऐ मेरे मालिक तूने गुल को गुलशन में जगह दी, पानी को दरिया में जगह दी, पंछियो को आसमान मे जगह दी, तू उस शख्स को जन्नत में जगह देना, जिसने मुझे "..नौ.." महीने पेट में जगह दी....!! !!!माँ !!!
--------------------------------------------
देखा करो कभी अपनी माँ की आँखों में, ये वो आईना है जिसमें बच्चे कभी बूढ़े नहीं होते!
--------------------------------------------
कुछ इसलिये...
रविवार, 11 अक्टूबर 2015
Posted by Maneesh on 9:21 am

Sad Shayari - दर्द भरी शायरी
दिमाग पे जोर डाल कर गिनते हो गलतियाँ मेरी
कभी दिल पे हाथ रख के पूछा कसूर किसका था
-------------------------------------------------
ना जाने क्या कमी है मुझमें, ना जाने
क्या खूबी है उसमें,
वो मुझे याद नहीं करती, मैं उसको भूल
नहीं पाता
-------------------------------------------------
तमाम उम्र उसी के ख़याल में गुजारी,
मेरा ख़याल जिसे उम्र भर नहीं आया
-------------------------------------------------
मैं...
Posted by Maneesh on 9:02 am
Sharaab Shayari - शराब शायरी
ग़म इस कदर बढे कि घबरा कर पी गया;
इस दिल की बेबसी पर तरस खा कर पी गया;
ठुकरा रहा था मुझे बड़ी देर से ज़माना;
मैं आज सब जहां को ठुकरा कर पी गया!
----------------------------------------------
यूँ तो ऐसा कोई ख़ास याराना नहीं है मेरा;
शराब से...
इश्क की राहों में तन्हा मिली तो;
हमसफ़र बन गई.......
----------------------------------------------
कुछ तो शराफ़त सीख ले, ऐ इश्क!, शराब से..
बोतल पे लिखा तो है, मै जानलेवा हूँ...
----------------------------------------------
पर्दा...
शनिवार, 3 अक्टूबर 2015
Posted by Maneesh on 10:42 am
आप जिनके क़रीब होते हैं
आप जिनके क़रीब होते हैं, वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं जब तबीयत किसी पर आती है, मौत के दिन करीब होते हैं मुझसे मिलना फिर आप का मिलना, आप किस को नसीब होते हैं जुल्म सह कर जो उफ्फ नहीं करते, उनके दिल भी अजीब होते हैं इश्क़ में और कुछ नहीं मिलता, सैकड़ों ग़म नसीब होते हैं 'नूह' की क़द्र कोई क्या जाने, कहीं ऐसे अदीब होते हैं।...
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015
Posted by Maneesh on 10:17 am
आप की याद आती रही रात भर
आप की याद आती रही रात भर
चस्मे-नम मुस्कुराती रही रात भररात भर दर्द की शमा जलती रही
गम की लौ थरथराती रही रात भरबाँसुरी की सुरीली सुहानी सदा याद बन बन के आती रही रात भर याद के चाँद दिल में उतरते रहे चाँदनी जगमगाती रही रात भरकोई दीवाना गलियों में फिरता रहाकोई आवाज आती रही रात भर ...
रविवार, 27 सितंबर 2015
Posted by Maneesh on 10:08 am
गर यही है आदत-ए-तकरार हँसते बोलते
मुँह की एक दिन खाएँगे अग्यार हँसते बोलते
थी तमन्ना बाग-ए-आलम में गुल-ओ-बुलबुल की तरह
दिल-लगी में हसरत-ए-दिल कुछ निकल जाती तो है
मेरी किस्मत से जबान-ए-तीर भी गोया नहीं
आप को देखा सर-ए-बाजार हँसते बोलते
वर्ना क्या क्या जखम-ए-दामनदार हँसते बोलते
बैठ कर हम तुम कहीं ए यार हँसते बोलते
आज उज्र-ए-इत्तिका तस्लीम कल तक यार से
बोसे ले लेते हैं हम दो-चार हँसते बोल...
शनिवार, 26 सितंबर 2015
Posted by Maneesh on 9:26 am
मिली जो किसी से नज़र तो समझो गजल हुई
रहे न अपनी ही खबर तो समझो गजल हुइ
मिला के नजरों को वाले हना हया से पी
झुका ले कोइ नजर तो समजो गजल हुइ
इधर मचल-कर उन्हें जो पुकारे जूनून मेरा
धड़क उठे उधर दिल तो
उदास बिस्तर की सिलवटेँ जब तुमको चुभें
न सो सको रात भर तो समझो गजल हुइ
वह बदगुमान हो तो शेर सूझे न शायरी,
वह मेहरबान हो जफ़र तो समझो गजल हुइ...
सदस्यता लें
संदेश (Atom)